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उत्तराखंड एक जिला-एक नदी कार्यक्रम के तहत नदियां चयनित 2026

उत्तराखंड सरकार की बड़ी पहल: 'एक जिला-एक नदी' कार्यक्रम से 13 नदियों  उत्तराखंड के जल स्रोतों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में 'एक जिला-एक नदी' (One District-One River) कार्यक्रम के तहत कुल 13 नदियों का चयन किया गया है, जिन्हें वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों से पुनर्जीवित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरुआती चरण के लिए 44 करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी गई है।  📍 इन 13 नदियों का हुआ है चयन (जिलेवार सूची)  इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से निम्नलिखित प्रमुख नदियों और उनकी सहायक धाराओं को पुनर्जीवित करने के लिए चुना गया है:  • जटा गंगा – अल्मोड़ा  • गरुड़ गंगा – बागेश्वर  • चंद्रभागा – चमोली  • गौड़ी – चंपावत  • गडूल-सोंग – देहरादून  • पथरी – हरिद्वार  • शिप्रा-गोला – नैनीताल  • नयार पूर्वी – पौड़ी  • धुरगतिया-घिरगड़-पूर्वी रामगंगा – पिथौरागढ़  • पनार – रुद्रप्रयाग  • सोंग – टिहरी  • फीका – ऊधम सिंह नगर  • कमल – उत्तरकाशी...

Uttarakhand Current Affair August 2026

  19 शिक्षकों को शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार 2025 राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 प्रदान किए गए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की शिक्षिका मनीषा निगम और पौड़ी जिले के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया।  चमोली जिले में स्थित माँ राजराजेश्वरी नंदा के सिद्धपीठ कुरुड मंदिर में मां नंदा की जात यात्रा का हुआ भव्य शुभारंभ। केंद्रित मोबाइल एप 'मनोरमा कृषि रक्षक' में खेती से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इसरो ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से देश के पहले इमेजिंग सेटेलाइट को सफलतापूर्वक लांच किया ड्यौलीसेरा ट्रेक:-ज्योतिर्मठ, चमोली के करछों गांव से शुरू होता है ट्रेक, पर्यटन विभाग द्वारा ट्रेक ऑफ दी ईयर 2026 घोषित साहसिक पर्यटन : 700 किमी दुर्गम मार्गों पर दिखेगा साइकिल का रोमांच | नैनीताल के मुक्तेश्वर से शुरू होगा सात दिनों का सफर बागेश्वर, कर्णप्रयाग, गुप्तकाशी, टिहरी होते हुए पहुंचेगा मसूर...

उत्तराखंड में कृषि के प्रकार एवं भूमि उपयोग Notes

    उत्तराखंड में कृषि के प्रकार एवं भूमि उपयोग कृषि के प्रमुख प्रकार समोच्च खेती ( Contour Farming): इसे कण्टूर फार्मिंग भी कहते हैं , यह कम नमी वाली भूमि पर की जाती है। सीढीदार खेती: अधिक ढालू भूमि पर आढ़ी जुताई करके की जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में 15% तक ढाल वाली भूमि को खेती योग्य बनाया जा सकता है। झूमिंग खेती (स्थानान्तरीय कृषि): वनों को साफ कर कृषि भूमि बनाना और उर्वरता रहने तक खेती करना। यह भारत के पूर्वोत्तर और उत्तराखंड की कुछ जनजातियों में प्रचलित है। भूमि उपयोग सांख्यिकी (जनपद वार) विवरण सर्वाधिक ( Max) सबसे कम ( Min) शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल ऊधम सिंह नगर चम्पावत ऊसर (बंजर) भूमि चमोली नैनीताल परती भूमि ( Fallow Land) पौड़ी रुद्रप्रयाग चारागाह भूमि चमोली - पशुपालन एवं कृषि विकास योजनाएं प्रमुख संस्थान एवं स्थापना उत्तराखंड स्टेट सीड सर्टिफिकेशन अभिकरण: 14 मार्...

शरीर के अंगों के अनुसार उत्तराखंड के प्रमुख आभूषण

शरीर के अंगों के अनुसार उत्तराखंड के प्रमुख आभूषण क) सिर व माथे के आभूषण शिशफूल, मांगटीका, सुहाग बिंदी, बेनीफूल, बांधी। बांधी: बिंदी से बड़े आकार का आभूषण (माथे पर धारण); मान्यतानुसार इसमें मुगलकालीन चित्रशैली का अंकन मिलता है। भोटिया जनजाति विशेष (माथे/सिर): बीराबाली, छाकबाली, पतेली बाली। ख) कान के आभूषण मूर्खली (मुर्खी / मुदुर / मुनार / मर्खिया): जौनसार व अन्य क्षेत्रों में प्रचलित। बाली (बल्ली), कुंडल, तुगल (बुजनी), गोख (गाखर), जलकछव, मछली। कर्णफूल: इसे जोहार क्षेत्र में 'झुपझुपी' भी कहा जाता है। झुमके (उतरो / उतराइयाँ): ऊपरी कान में पहने जाने वाले झुमके। ग) नाक के आभूषण नथ (नथिया / बेसर): नाक का बड़ा आभूषण। बुलाक (बिसार): नाक के बीच के हिस्से में पहना जाने वाला। फूली (लौंग), बीरा (बीड़), श्रृंगारपूरी। अंतर ध्यान रखें: केवल 'बीरा' आए तो नाक का आभूषण; 'बीराबाली' आए तो सिर/माथे का। घ) गले के आभूषण गुलबंद (गलबंद): कुमाऊँ क्षेत्र में इसे 'रामनवमी' भी कहा जाता है। हसूली (खुगा / खोंग / सतुवा / सूत): बच्चों एवं महिलाओं का चांदी का आभूषण। हमेल: ...