उत्तराखंड में कृषि के प्रकार एवं भूमि उपयोग Notes

  


उत्तराखंड में कृषि के प्रकार एवं भूमि उपयोग

कृषि के प्रमुख प्रकार

  • समोच्च खेती (Contour Farming): इसे कण्टूर फार्मिंग भी कहते हैं, यह कम नमी वाली भूमि पर की जाती है।
  • सीढीदार खेती: अधिक ढालू भूमि पर आढ़ी जुताई करके की जाती है। पर्वतीय क्षेत्रों में 15% तक ढाल वाली भूमि को खेती योग्य बनाया जा सकता है।
  • झूमिंग खेती (स्थानान्तरीय कृषि): वनों को साफ कर कृषि भूमि बनाना और उर्वरता रहने तक खेती करना। यह भारत के पूर्वोत्तर और उत्तराखंड की कुछ जनजातियों में प्रचलित है।

भूमि उपयोग सांख्यिकी (जनपद वार)

विवरण

सर्वाधिक (Max)

सबसे कम (Min)

शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल

ऊधम सिंह नगर

चम्पावत

ऊसर (बंजर) भूमि

चमोली

नैनीताल

परती भूमि (Fallow Land)

पौड़ी

रुद्रप्रयाग

चारागाह भूमि

चमोली

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पशुपालन एवं कृषि विकास योजनाएं

प्रमुख संस्थान एवं स्थापना

  • उत्तराखंड स्टेट सीड सर्टिफिकेशन अभिकरण: 14 मार्च 2001 (गुणात्मक बीज हेतु)।
  • आर्गेनिक सर्टिफिकेशन एजेंसी: 8 जून 2006 (देहरादून)।
  • उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड: देहरादून (प्रशिक्षण केंद्र: ऋषिकेश)।
  • अतिहिमीकृत वीर्य उत्पादन केंद्र: श्यामपुर, देहरादून।
  • गो-विज्ञान एवं प्रौद्यौगिकी संस्थान: पशुलोक, ऋषिकेश।
  • डेयरी शोध एवं विकास केंद्र: नैनीताल।
  • मिल्क पाउडर प्लांट: ऊधम सिंह नगर।

महत्वपूर्ण योजनाएं एवं कार्यक्रम

  • किसान रत्न सम्मान योजना: शुरुआत 2010 में।
  • समन्वित डेरी विकास परियोजना: शुरुआत 2002-03 में।
  • प्रथम दुग्ध संघ: 1949 में हल्द्वानी (नैनीताल) में स्थापित।
  • आंचल ब्रांड: राज्य में दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति इसी नाम से होती है।
  • गंगा गाय महिला डेयरी योजना: 28 दिसम्बर 2017
  • मेरिनों भेड़ आयात: भेड़ों की नस्ल सुधार हेतु आस्ट्रेलिया से आयात।
  • राष्ट्र माता का दर्जा: सितम्बर 2018 में विधानसभा द्वारा गाय को दिया गया।

3. उत्तराखंड में सिंचाई व्यवस्था

सिंचाई के आंकड़े

  • कुल सिंचित क्षेत्र: बोये गए क्षेत्रफल का 48.88% (मैदानी भाग: 94%, पर्वतीय भाग: 13%)
  • सिंचाई के स्रोत: सर्वाधिक नलकूप (64.45%), उसके बाद नहरें (24.90%)

जनपद वार सिंचाई स्थिति

  • सर्वाधिक शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल: 1. ऊधम सिंह नगर (99.5%), 2. हरिद्वार, 3. नैनीताल।
  • सबसे कम शुद्ध सिंचित क्षेत्रफल: चमोली और अल्मोड़ा।
  • नलकूप सिंचाई (घटते क्रम में): ऊधम सिंह नगर > हरिद्वार > नैनीताल > देहरादून।
  • नहर सिंचाई (घटते क्रम में): ऊधम सिंह नगर > नैनीताल > देहरादून > हरिद्वार।

प्रमुख नहरें एवं जल संरक्षण

  • ऊपरी गंगा नहर: राज्य की सबसे पुरानी नहर (निर्माण: 1842-54)
  • शारदा नहर: 1928 में बनबसा (चम्पावत) से काली नदी से निकाली गई।
  • चाल-खाल योजना: इसका मुख्य संबंध जल स्तर सुधार (Water Table Improvement) से है।

 

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