उत्तराखंड एक जिला-एक नदी कार्यक्रम के तहत नदियां चयनित 2026
उत्तराखंड सरकार की बड़ी पहल: 'एक जिला-एक नदी' कार्यक्रम से 13 नदियों
उत्तराखंड के जल स्रोतों और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य में 'एक जिला-एक नदी' (One District-One River) कार्यक्रम के तहत कुल 13 नदियों का चयन किया गया है, जिन्हें वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों से पुनर्जीवित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के शुरुआती चरण के लिए 44 करोड़ रुपये की राशि भी जारी कर दी गई है।
📍 इन 13 नदियों का हुआ है चयन (जिलेवार सूची)
इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के अलग-अलग जिलों से निम्नलिखित प्रमुख नदियों और उनकी सहायक धाराओं को पुनर्जीवित करने के लिए चुना गया है:
• जटा गंगा – अल्मोड़ा
• गरुड़ गंगा – बागेश्वर
• चंद्रभागा – चमोली
• गौड़ी – चंपावत
• गडूल-सोंग – देहरादून
• पथरी – हरिद्वार
• शिप्रा-गोला – नैनीताल
• नयार पूर्वी – पौड़ी
• धुरगतिया-घिरगड़-पूर्वी रामगंगा – पिथौरागढ़
• पनार – रुद्रप्रयाग
• सोंग – टिहरी
• फीका – ऊधम सिंह नगर
• कमल – उत्तरकाशी
💡 योजना की मुख्य बातें और कार्ययोजना
1. स्थानीय निवासियों की भागीदारी
इस परियोजना को सफल बनाने के लिए स्थानीय लोगों को विश्वास में लिया जाएगा। नदी संरक्षण और जल संवर्धन के विभिन्न कार्यों में ग्रामीणों और स्थानीय निकायों का सहयोग बेहद जरूरी माना गया है।
2. डीपीआर (DPR) और बजट की स्थिति
वर्तमान में बागेश्वर और ऊधम सिंह नगर जिले में चयनित नदियों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। वहीं, शेष अन्य जिलों की नदियों के लिए बजट (धनराशि) पहले ही आवंटित की जा चुका है। कुछ जिलों में कार्ययोजना पर काम शुरू भी हो चुका है, जबकि बाकी जगहों पर जल्द शुरुआत की तैयारी है।
3. सहायक धाराओं और छोटी जलधाराओं पर ध्यान
नदियों के मुख्य प्रवाह के साथ-साथ उनकी सहायक नदियों और छोटी जलधाराओं (गधेरों) को भी इस कार्यक्रम में विशेष महत्व दिया गया है। जलसमेत (Watershed) क्षेत्रों में पानी को रोककर, उसे जमीन के भीतर उतारने (Groundwater Recharge) का प्रयास किया जाएगा, जिससे सूखते जा रहे जल स्रोत फिर से जीवित हो सकें।