उत्तराखंड के प्रमुख मंदिर
उत्तराखंड के प्रमुख मंदिर
तुंगनाथ, रुद्रप्रयाग
ऊंचाई: 3680 मीटर
पर्वत: चंद्रशिला
शीतकाल में पूजा: मुकुट में की जाती है।
क्षेत्र: हरिहर क्षेत्र के नाम से जाना जाता है।
शैली: कस्तूरी शैली
अद्वितीय विशेषता: यहाँ बिना मूँछ वाले चूहे पाए जाते हैं।
नदी: बालखिलया नदी यहीं से निकलती है।
मूर्ति: गर्भगृह में शंकराचार्य की मूर्ति है।
महत्व: यह तीसरा केदार है जहाँ भगवान शिव की भुजा की पूजा की जाती है।
NH:-
यमुनोत्री मंदिर, उत्तरकाशी
स्थापना: इसका सुदर्शन शाह ने कराया और इसका जीर्णोद्धार प्रताप शाह ने कराया।
स्थान: उत्तरकाशी में स्थित है।
ऊंचाई: 3235 मीटर
पूजा: सबसे पहले गंगोत्री की पूजा की जाती है।
राष्ट्रीय राजमार्ग: नेशनल हाईवे 134
कुंड: यहाँ सूर्यकुंड, उत्तम कुंड, और ब्रह्म कुंड हैं।
महत्व: यह जानकी चट्टी से 20 गाँव के नाम से जाना जाता है।
सूर्यकुंड की तुलना: इसकी तुलना न्यूजीलैंड के कैसर गैस से की जाती है।
सूर्यकुंड का तापमान: 195°F
मंदिर की शैली: क्यूरी शैली
उत्तराखंड के प्रमुख मंदिर एवं उनकी ऊंचाई
पंच केदार ऊंचाई का क्रम (लगभग):
तुंगनाथ ( 3680 मीटर)
केदारनाथ ( 3584 मीटर)
मदमहेश्वरनाथ ( 3497 मीटर)
रुद्रनाथ ( 2286 मीटर)
कल्पेश्वरनाथ ( 2200 मीटर)
तुंगनाथ मंदिर (रुद्रप्रयाग):
यह सबसे अधिक ऊंचाई ( 3680 मीटर) पर स्थित मंदिर है।
यह चंद्रशिला पर्वत पर स्थित है।
नीलकंठ महादेव (पौड़ी):
यह ऋषिकेश के पास मधुमती और पंकजा नदियों के संगम पर,
शंभु और निशुंभ पर्वतों के बीच स्थित है।
केदारनाथ धाम:
यहाँ भगवान शिव के पृष्ठ भाग (पीठ) की पूजा होती है।
पुजारी: मैसूर के जंगम ब्राह्मण।
शीतकालीन पूजा: ओखीमठ (ओमकारेश्वर मंदिर) में।
मेला: भतूज या अन्नकूट मेला।
बद्रीनाथ धाम:
इसे 'सारस्वत तीर्थ' के नाम से भी जाना जाता है।
सूर्य मंदिर
मैथ का सूर्य मंदिर: पिथौरागढ़, डीडीहाट
कुलसरी का सूर्य मंदिर: चमोली
भटवारी का सूर्य मंदिर: उत्तरकाशी, मंजियाली में
पुरोला का सूर्य मंदिर: पुष्पक शैली में बना है।
खेतीखान सूर्य मंदिर: लोहाघाट, चंपावत। यहाँ दीप महोत्सव मनाया जाता है।
कोडरमा सूर्य मंदिर: अल्मोड़ा में उत्तराखंड शैली में बना है। यहाँ बूट पहने हुए सूर्य की प्रतिमा मिली है।
कटारमल सूर्य मंदिर (अल्मोड़ा):
यह कुमाऊं का रणचंडी कहलाता है।
यहाँ नौवीं-दसवीं शताब्दी के 45 मंदिरों का समूह है।
यहाँ तीन पंक्तियों वाला एक अपठित शिलालेख मिला है, जो अब राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में है।
इसे बड़ादित्य सूर्य मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
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