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गरुड़ छाड़ मेला कहाँ लगता है?

  गरुड़ छाड़ मेला कहाँ लगता है? उत्तर: गरुड़ छाड़ मेला ज्योतिर्मठ (जोशीमठ), उत्तराखंड के नरसिंह मंदिर परिसर में आयोजित होता है। व्याख्या: यह मेला ज्योतिर्मठ स्थित नरसिंह मंदिर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। इसमें भगवान विष्णु को गरुड़ (वाहन) पर प्रतीकात्मक रूप से विराजमान कर यात्रा निकाली जाती है। यह मेला बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले,आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि इस आयोजन के बाद भगवान बद्रीनाथ गरुड़ पर सवार होकर धाम के लिए प्रस्थान करते हैं।

लुप्त संख्या ज्ञात करें

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 Q.1 x का मान ज्ञात करें। यहाँ एक पैटर्न फॉलो हो रहा है—हर दो स्टेप के बाद 8 को बढ़ते हुए गुणांक (multiplier) के साथ जोड़ा जा रहा है: पहले दो स्टेप में 8 और 8 जोड़ा गया अगले दो स्टेप में (8 *2 = 16) जोड़ा गया उसके बाद के दो स्टेप में (8 * 3 = 24) जोड़ा गया इसी क्रम को आगे बढ़ाते हैं   अब क्रम अनुसार जोड़ते हैं: (1 + 8*1 = 9) (9 + 8*1 = 17) (17 + 8 *2 = 33) (33 + 8 *2 = 49) (49 + 8 *3 = 73) (73 + 8 *3 = 97) (97 + 8 *4 = 129)   अतः x का मान = 129 Q.2 लुप्त संख्या ज्ञात करें    यहां पर जो पैटर्न फॉलो हो रहा है वह इस प्रकार से है पहली संख्या से नीचे की दो संख्याओं के अंको के  योग से घटना है      18-(5+2+2)=9     20-(1+5+4+0)=10     26-(1+1+3+8)=13 तो यहां पर लुप्त संख्या का मान 10 हो जाएगा

उत्तराखण्ड की प्रमुख पुस्तकें

  उत्तराखण्ड की प्रमुख पुस्तकें मसूरी मेड़ले द ब्याय फ्रॉम लम्बाट हिमालयन ट्रैवल्स ( 1920) गढ़वाल एन्शिएंट एंड मार्डन ( 1917) पटवारी , घराट एवं चाय ब्रिटिश कुमाऊँ-गढ़वाल , हिस्ट्री ऑफ गढ़वाल मैन एंड फारेस्ट वंडरिंग इन द वैली ऑफ फ्लावर्स द फॉरेस्ट प्रोबलम इन कुमाऊँ राजपूत पेंटिग हिमालय आर्ट द ट्रैवलर गाइड टू उत्तराखण्ड हिमालयन पिलग्रिमेज एंड न्यू टूरिज्म हिल डायलेक्ट्स ऑफ द कुमाऊँ डिवीजन लोनली फरोज ऑफ द बार्डर लैंड ए लिंग्विस्टिक स्टडी ऑफ जौनसारी मेम्वायर्स ऑफ देहरादून ( 1874) होली हिमालय ( 1905) हिमालयन फोकलोर ( 1935) गढ़वाल (देहरादून) गजेटियर्स ( 1911) ब्रिटिश गढ़वाल गजेटियर्स अल्मोड़ा गजेटियर्स ( 1928) ट्रैवल इन इंडिया ट्रेक टू पिण्डारी ग्लेशियर द अर्ली ट्रैवल्स इन इंडिया जंगल ट्रैल्स इन नार्दन इंडिया ए फारेस्ट फ्लोरा ऑफ कुमाऊँ ए जर्नी टु द लेक मानसरोवर हिमालयन डिस्ट्रिक्ट गजेटियर्स ( 1882-86) गणेश शैली एन. एस. थापा जोध सिंह नेगी डॉ पातीराम आर एस टोलिया आर ए...

प्रमुख ताल

  प्रमुख ताल नैनीताल: इसे 'त्रिऋषि सरोवर' कहा जाता है। भीमताल: कुमाऊं की सबसे बड़ी झील (पौराणिक नाम: भीमहृद)। यह कमल ककड़ी के लिए प्रसिद्ध है। नौकुचिया ताल: नैनीताल जिले की सबसे गहरी झील (9 कोनों वाली)। पौराणिक नाम: सनत कुमार सरोवर। सातताल: इसकी आकृति अश्वखुर (घोड़े के खुर) के समान है। श्यामला ताल (चंपावत): यह सफेद कमल के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ विवेकानंद आश्रम स्थित है। रूपकुंड (चमोली): इसे 'रहस्यमयी ताल' या 'कंकाल ताल' कहा जाता है। सहस्त्रताल (टिहरी): गढ़वाल क्षेत्र का सबसे बड़ा और गहरा ताल। यहाँ से धर्मगंगा निकलती है।

तीलू रौतेली पुरस्कार 2025

  तीलू रौतेली पुरस्कार 2025 उत्तराखंड में सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव लाने वाली 13 महिलाओं को तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनके नाम और योगदान इस प्रकार हैं: हेमा नेगी करासी: लोक गायिका। विजयलक्ष्मी: सामाजिक क्षेत्र में दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल की स्थापना की। रूमा देवी: खेल। हरिद्वार  सुरभि खनेड़ा: साहित्य। चमोली  अलिशा मनराल: ताइक्वांडो खिलाड़ी, नेशनल प्रतियोगिता में दो स्वर्ण समेत आठ पदक जीते। बागेश्वर  रेखा भट्ट: सामाजिक क्षेत्र। पिथौरागढ़ मीरा उपाध्याय: महिलाओं के सामाजिक उत्थान। अल्मोडा अनामिका: कराटे खिलाड़ी, अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में रजत पदक जीता। लोहाघाट  नैना अधिकारी: अंतरराष्ट्रीय कयाकिंग खिलाड़ी। नैनीताल  रेखा: पैरा थ्रोबॉल चैंपियनशिप। शिवानी गुप्ता: महिलाओं को कराटे का प्रशिक्षण देती हैं। ऋषिकेश रोशमा देवी: सामाजिक क्षेत्र। पौड़ी

उत्तराखण्ड महक (सुगंध) क्रांति नीति 2026–2036

  उत्तराखण्ड महक (सुगंध) क्रांति नीति 2026–2036 लॉन्च तिथि – 13 दिसंबर 2025 लॉन्च स्थान – सगंध पौधा केंद्र, सैलाकुई (देहरादून) लॉन्च किया – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उद्देश्य सुगंधित फसलों का विकास 1 लाख किसानों को जोड़ना 10 वर्षों में टर्नओवर ₹100 करोड़ → ₹1200 करोड़ विशेष पहल 7 एरोमा वैलियाँ तिमूर वैली – पिथौरागढ़ डेमस्क रोज – चमोली, अल्मोड़ा सिनेमन – चंपावत, नैनीताल मिंट – ऊधम सिंह नगर लेमनग्रास + मिंट – हरिद्वार, पौड़ी अन्य भावाला (देहरादून) में सैटेलाइट सेंटर का लोकार्पण एएमएस प्रयोगशाला का शिलान्यास MoU – सगंध पौधा केंद्र + Dabur India Ltd.

उत्तराखंड करेंट अफेयर्स: मुख्य बिंदु (दिसंबर 2024 - जनवरी 2025)

  उत्तराखंड करेंट अफेयर्स: मुख्य बिंदु (दिसंबर 2024 - जनवरी 2025) 1. वन्य जीव और संघर्ष नियंत्रण आधुनिक वन्य जीव वध्याकरण केंद्र: उत्तराखंड सरकार द्वारा प्रत्येक जिले में इसे स्थापित करने की घोषणा की गई है। मुख्य उद्देश्य: मानव और वन्य जीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) को कम करना तथा वन्य जीवों की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करना। संदर्भ: आजकल उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में बाघ, गुलदार और भालू का बस्तियों की ओर आना एक बड़ी समस्या बन गया है। 2. पर्यावरण एवं पुरस्कार ग्लोबल ग्रीन राष्ट्रीय अवार्ड: यह बी.एल. शाह को पर्यावरण संरक्षण के लिए दिया गया है। ग्लोबल ग्रीन अवार्ड 2025: यह वन विभाग के अधिकारी जगदीश बाबुला को मिला है (इन्होंने 1970 के दशक से लाखों पेड़ लगाए हैं)। स्पर्श गंगा महोत्सव 2025: इसका आयोजन लेखक गांव (थानों), देहरादून में किया गया। स्पर्श गंगा शिक्षा श्री अवार्ड 2025: ममता जी को इस सम्मान से नवाजा गया। 3. महोत्सव और आयोजन राज्य स्तरीय माल्टा महोत्सव: इसका आयोजन देहरादून में किया गया (सिट्रस फ्रूट्स को बढ़ावा देने हेतु)। आपदा प्रबंधन बैठक 2025: इसका आयोजन ...

उत्तराखंड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 (उत्तराखंड आर्थिक सर्वेक्षण)

उत्तराखंड इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 ( उत्तराखंड आर्थिक सर्वेक्षण) प्रमुख आर्थिक बिंदु ·       राज्य की विकास दर: 2024-25 में उत्तराखंड की अनुमानित विकास दर 6.61% है , जबकि देश की 6.4% है। ·       सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी): o   प्रचलित भावों पर: 2024-25 में उत्तराखंड की जीडीपी ₹3,78,245 करोड़ अनुमानित है। o   स्थिर भावों पर: ( आधार वर्ष 2011-12) 2024-25 में यह ₹2,17,823 करोड़ है। ·       मूल्य संवर्धन: सेक्टर के हिसाब से सबसे ज़्यादा वृद्धि लोक प्रशासन और अन्य सेवाओं ( 13.58%) में हुई है , जबकि सबसे कम वित्त सेवाओं ( 6.78%) में हुई है। अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों का योगदान प्राथमिक , द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों के योगदान पर ·       प्राथमिक क्षेत्र (कृषि): उत्तराखंड की जीडीपी में 9.34% का योगदान है। इसमें कृषि का योगदान सबसे ज़्यादा ( 36.48%) है। ·       द्वितीयक क्षेत्र (औद्योगिक): जीडीपी में 44.65% का योगदान है। इसमें विनिर्माण का योगदान सबसे ज़्यादा ( 58.56%) है। ·   ...